‘.com’ नहीं, अब ‘.भारत’ डोमेन से भी खुलेंगी वेबसाइट्स, हिंदी URL को लेकर मोदी सरकार की पहल

इंटरनेट एड्रेस को क्षेत्रीय भाषाओं में अपनाने के लिए 'यूनिवर्सल एक्सेप्टेंस इनिशिएटिव' के तहत सरकार ने इंटरनेशनलाइज्ड डोमेन नेम्स (IDNs) की शुरुआत की है। इसके तहत अब ईमेल आईडी और वेबसाइट URLs भारतीय भाषाओं में बनाए जा सकेंगे।

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Hindi Domain Names : भारत सरकार ने डिजिटल दुनिया में आम लोगों की पहुंच को आसान बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब इंटरनेट पर सरकारी वेबसाइट्स को अंग्रेजी में ही नहीं, बल्कि हिन्दी में भी एक्सेस किया जा सकेगा।

यह बदलाव खासकर उन लोगों के लिए मददगार साबित होगा, जिन्हें अंग्रेजी में वेबसाइट टाइप करने में दिक्कत होती है। सरकार ने कई पोर्टल्स के वेब अड्रेस हिन्दी भाषा में भी शुरू कर दिए हैं, जिससे इंटरनेट पर हिन्दी भाषी यूजर्स की भागीदारी बढ़ेगी। आने वाले वर्षों में भारत की भाषाओं को तकनीकी रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

Not '.com', now websites will open from '.bharat' domain too
Not ‘.com’, now websites will open from ‘.bharat’ domain too

अब “गृहमंत्रालय.सरकार.भारत” टाइप कर भी खुलेगी वेबसाइट

इंटरनेट एड्रेस को क्षेत्रीय भाषाओं में अपनाने के लिए ‘यूनिवर्सल एक्सेप्टेंस इनिशिएटिव’ के तहत सरकार ने इंटरनेशनलाइज्ड डोमेन नेम्स (IDNs) की शुरुआत की है। इसके तहत अब ईमेल आईडी और वेबसाइट URLs भारतीय भाषाओं में बनाए जा सकेंगे।

उदाहरण के तौर पर, गृह मंत्रालय की वेबसाइट तक अब केवल mha.gov.in से ही नहीं, बल्कि ‘गृहमंत्रालय.सरकार.भारत’ टाइप कर भी पहुंचा जा सकता है। इससे हिन्दी बोलने और समझने वाले लोगों को वेबसाइट इस्तेमाल करने में और आसानी होगी। वेबसाइट दोनों भाषाओं – हिन्दी और अंग्रेज़ी – में उपलब्ध है।

“.in” नहीं, अब “.भारत” होगा डोमेन का हिस्सा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार अब पारंपरिक ‘.in’ की जगह ‘.भारत’ डोमेन का प्रयोग कर रही है। यह केवल हिन्दी तक सीमित नहीं रहेगा। जल्द ही तमिल, तेलुगू, बंगाली जैसी अन्य भारतीय भाषाओं में भी वेब अड्रेस उपलब्ध होंगे।

दरअसल, इंटरनेट की शुरुआत से लेकर अब तक वेबसाइट एड्रेस में सिर्फ अंग्रेज़ी कैरेक्टर ही चलन में थे, क्योंकि शुरुआत में कम्प्यूटर ASCII कोडिंग सिस्टम पर आधारित थे, जो केवल अंग्रेजी अक्षरों को सपोर्ट करता था। इसी वजह से अन्य भाषाओं में वेबसाइट एड्रेस बनाना संभव नहीं था।

वर्षों की तकनीकी मेहनत के बाद मिली सफलता

1980 के दशक से वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ गैर-अंग्रेज़ी भाषाओं को इंटरनेट पर लाने की कोशिशों में जुटे थे। अब आधुनिक वेब ब्राउजर इतनी तकनीकी क्षमता रखते हैं कि वे स्थानीय भाषाओं के कोड्स को समझकर उन्हें यूजर की भाषा में दिखा सकते हैं। फिर भी अभी भारत में अधिकतर वेबसाइट्स अंग्रेज़ी एड्रेस के जरिए ही ओपन होती हैं। इसी को बदलने के लिए सरकार ने स्थानीय भाषाओं के वेब अड्रेस को बढ़ावा देना शुरू किया है। अब जिन सरकारी वेबसाइट्स में यह सुविधा लागू की गई है, उनके डोमेन में “.भारत” का इस्तेमाल हो रहा है।

कई मंत्रालयों की वेबसाइट्स अब हिन्दी में भी

गृह मंत्रालय के अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) की वेबसाइट्स भी अब हिन्दी वेब अड्रेस में उपलब्ध हैं। इस दिशा में ‘Bhashanet’ नामक एक खास कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है, जिसका मकसद है ज्यादा से ज्यादा सरकारी विभागों और संस्थाओं को क्षेत्रीय भाषाओं वाले IDNs अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना हैं

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