Jalore Jeera News: जालोर का जीरा गुजरात में हो रहा प्रोसेसिंग, आसमानी दामे में बीक रहा है.
Jalore Jeera News: ग्रेनाइट सिटी के नाम से मशहूर जालोर कृषि प्रधान क्षेत्र भी है। इस क्षेत्र में जीरे की बुवाई 90 प्रतिशत भाग पर की जाती है। यहां की सदियों से जीरे की खेती की जाती है। पूरे पश्चिमी राजस्थान में इस क्षेत्र को जीरा का हब कहा गया है। लेकिन इस के बाद भी किसानों को इस बुवाई से उतना लाभ नहीं मिल पा रहा है, जितने वो किसान हकदार हैं।

जालोर जिले के सांचौर, रानीवाड़ा, भीनमाल, सायला, जालोर, चितलवाना, आहोर के क्षेत्रों में जीरे की अच्छी खासी पैदावार होती है। लेकिन जीरे की प्रोसेसिंग की युनिट आस-पास मौजूद नहीं है। इस स्थिति में किसान जीरे को बेचने पड़ोसी राज्य गुजरात की ओर रुख करते हैं। गुजरात के व्यापारी कम दामों में खरीदकर प्रोसेसिंग कर तिगुने दाम में हमारे ही बाजारों में बेचते हैं। इस कारण गुजरात को सीधे तौर पर फायदा हो रहा है।
इसलिए गुजरात का रुख करते हैं किसान
जालोर पड़ोसी राज्य गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों में आने के कारण यहां पैदा की गई फसले जीरा, इसबगोल, गेहूं, मुंगफली, रायड़ा, सरसों, बाजार आदि को बेचने गुजरात की मंडियों में रूख़ करने में मजूबर है। क्योंकि दाम भी मिल जाते हैं। किसानों को वहां रुकने की जरुरत नहीं पड़ती। कैश मार्केट होने के साथ समय की बचत किसानों को गुजरात की तरफ खींचता है।
जालोर जिले में 1 लाख 35 हजार हैक्टेयर भूमि से भी अधिक भाग पर ज़ीरे की औसतन हर वर्ष बुवाई होती है। इसके आधार पर 60 से 70 हजार मैट्रिक टन जीरे का उत्पादन अकेले जालोर में हो रहा है।
फैक्ट फाइल
- 1 लाख 50 हजार हैक्टेयर बुवाई क्षेत्र है जीरे का
- 60 से 65 हजार मीट्रिक टन उत्पादन होता है जीरे का सालाना
- 50 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में होती है इसबगोल की बुवाई जिले में
- 30 हजार मीट्रिक टन के करीब इसबगोल का उत्पादन
किसानों का दोहरा नुकसान
जीरे का अच्छा खासा प्रोडक्शन होने के बावजूद किसानों को जीरे की बिकवाली के लिए ऊंझा ही जाना होता है। वहां ही प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित है। यदि जालोर में ही बड़े एक्सपोर्ट आ जाएं और यही प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित हो जाए तो बेहतर क्वालिटी विदेशों तक पहुंच पाएगी। दूसरी तरफ किसानों का समय बचने के साथ मुनाफा बढ़ेगा।
रतनसिंह कानीवाड़ा, किसान नेता
हमारे क्षेत्र में पहले जीरे की खूब बुवाई होती थी और उसके बाद पैदावार की बिकवाली को लेकर दिक्कत रहती थी। अच्छी पैदावार होने पर गुजरात की तरफ ही रुख करना पड़ता था। यही कारण है कि बहुत से किसानों ने तो अब जीरे की फसल की बुवाई से दूरी बना ली है तो कुछ अब जीरे की बजाय अनार की फसल ले रहे हैं।
